साहित्यिक पोर्टफोलियो एवं रचनात्मक प्रयास
डॉ. प्रेमा खुल्लर का साहित्य भारतीय शास्त्रीय साहित्यिक परंपराओं और समकालीन मानवीय सत्यों के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करता है। 30 से अधिक प्रकाशित पुस्तकों, मौलिक संगीतात्मक रचनाओं और दशकों के प्रसार भारती (आकाशवाणी व दूरदर्शन) वार्ताओं के माध्यम से, उनका कार्य हिन्दी भाषा, आध्यात्मिक चेतना और नारियों के आंतरिक जीवन के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रकाशित कृतियां
डॉ. खुल्लर के ग्रन्थ-संग्रह की प्रत्येक कृति सूक्ष्म शिल्प विधान, सांस्कृतिक निष्ठा और लिखित शब्द के भावनात्मक सम्मोहन के प्रति उनकी अनवरत निष्ठा को प्रकट करती है:
1. उपन्यास एवं दीर्घ कथा साहित्य
मनमोहक और विस्तृत आख्यान जो व्यक्तिगत पहचान, पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों और समकालीन सामाजिक परिवर्तनों के जटिल अंतर्संबंधों का गहन विश्लेषण करते हैं। उनका कथा साहित्य अगाध सहानुभूति और मनोवैज्ञानिक गहराई के साथ मानवीय संबंधों के मौन संघर्षों और विजयों का सूक्ष्म अन्वेषण करता है।
2. कहानियां एवं लघु-कथाएं
दैनिक जीवन की सूक्ष्मताओं को समेटे हुए कहानियों का एक विस्तृत संग्रह। ये लघु रचनाएं परिवारों के भीतर अनकही संवेदनाओं, मानव आत्मा के अदम्य साहस और साधारण क्षणों में पाई जाने वाली गरिमा को आलोकित करती हैं।
3. कविता, गज़ल एवं पारंपरिक छंद
शास्त्रीय छंदों से लेकर चिंतनशील गज़लों और भक्ति पदों तक—विविध रूपों में फैली आत्मा को झंकृत करने वाली काव्यात्मक रचनाएं। गीतिमय सौंदर्य और दर्शन में रची-बसी उनकी कविताएं ईश्वरीय अनुराग से लेकर सामाजिक-सांस्कृतिक व्यथा के संपूर्ण भाव-संसार को अभिव्यक्त करती हैं।
4. साहित्यिक अनुवाद
भाषाई और सांस्कृतिक सीमाओं को लांघते हुए, डॉ. खुल्लर ने कालजयी और समकालीन कृतियों का हिन्दी में उत्कृष्ट अनुवाद किया है। उनका अनुवाद-दर्शन मूल रचना की भावनात्मक अंतरात्मा के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते हुए लक्ष्य भाषा (हिन्दी) में त्रुटिहीन शैलीगत प्रवाह बनाए रखने को प्राथमिकता देता है।
5. संपादकीय, निबंध एवं समीक्षात्मक टिप्पणी
देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं और सांस्कृतिक सामयिकी में प्रकाशित विचारोत्तेजक और विश्लेषणात्मक लेखन। ये निबंध हिन्दी साहित्य के विकास, सामाजिक सुधार, सौंदर्यशास्त्र के सिद्धांत और भारतीय विरासत की शाश्वत शक्ति पर शास्त्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
संगीत रचनाएं एवं गीतकारिता
डॉ. प्रेमा खुल्लर की काव्यात्मक संवेदनाएं सहज रूप से गीतकारिता में परिणत होती हैं, जहां उनके छन्दों को शास्त्रीय बंदिशों और पारंपरिक लोक धुनों द्वारा नई ऊंचाई मिलती है:
1. मां हरो मेरी पीर — पावन भक्ति एल्बम
डॉ. खुल्लर ने बहुचर्चित भक्ति संगीत एल्बम ‘मां हरो मेरी पीर’ के लिए अत्यंत भावपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी गीतों की रचना की। इस एल्बम में पद्मश्री से सम्मानित स्वर्गीय संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी जी का अप्रतिम संगीत संयोजन है, जो गहन आध्यात्मिक व्यथा को शास्त्रीय शुद्धता के साथ प्रस्तुत करता है।
2. स्वतंत्र संगीतात्मक एवं दृश्य परियोजनाएं
एक स्वतंत्र रचनाकार के रूप में, डॉ. खुल्लर ने पवित्र भारतीय परंपराओं का उत्सव मनाने वाली समर्पित दृश्य रचनाओं का लेखन, चित्रांकन और निर्माण किया है—जिसमें छठ पूजा की भावना और मातृत्व की शाश्वत पवित्रता को नमन करती मौलिक कृतियां शामिल हैं। ये रचनाएं उनके आधिकारिक मीडिया चैनलों पर उपलब्ध हैं।
प्रसारण मीडिया, आकाशवाणी एवं सार्वजनिक संवाद
दशकों से, डॉ. खुल्लर की आवाज़ और कविताएं राष्ट्रीय दूरदर्शन प्रसारणों, अकादमिक रेडियो वार्ताओं और प्रतिष्ठित साहित्यिक मंचों के माध्यम से भारत भर के करोड़ों श्रोताओं तक पहुंची हैं:
1. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन
प्रतिष्ठित कवि सम्मेलनों एवं कवि गोष्ठियों में निरंतर आमंत्रित उपस्थिति, जहां वे प्रत्यक्ष श्रोताओं, अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंडलों और राष्ट्रीय प्रसारण नेटवर्क के समक्ष हिन्दी कविता को जीवंत करती हैं।
2. विचार बिंदु
गहन दार्शनिक प्रश्नों, साहित्यिक विरासत और समाज के बदलते नैतिक ताने-बाने पर धारावाहिक चिंतन प्रस्तुत करने वाला एक दीर्घकालिक और समीक्षकों द्वारा सराहा गया आकाशवाणी कार्यक्रम
3. विशेष विश्वविद्यालय प्रसारण
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए प्रसारण मीडिया के माध्यम से दिए गए अकादमिक व्याख्यान, जो ऐतिहासिक साहित्यिक विषयों, काव्यात्मक छंदों और हिन्दी गद्य के विकास का गहन विश्लेषण प्रदान करते हैं।
4. वार्ता
दूरदर्शन एवं ऑल इंडिया रेडियो (AIR) पर ऐतिहासिक कला रूपों, भाषा संरक्षण और समकालीन साहित्यिक विमर्श को संबोधित करने वाली ज्ञानवर्धक परिचर्चाएं एवं बौद्धिक संवाद।
5. नारी दृष्टिकोण एवं सशक्तिकरण आख्यान
भारतीय साहित्य में महिला रचनाकारों, नारी जीवन के सामाजिक-भावनात्मक आयामों और नारी सशक्तिकरण के व्यावहारिक दृष्टिकोण पर केंद्रित विशेष टेलीविज़न एवं रेडियो वार्ताएं।
6. दूरदर्शन एवं ऑल इंडिया रेडियो आर्काइव्स
पारंपरिक छंदों का संग्रहणीय प्रसारण, मीडिया प्रोडक्शंस के लिए विशेष गीत-लेखन, तथा दूरदर्शन एवं ऑल इंडिया रेडियो पर प्रस्तुत किए गए प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम।
Awards & Achievements
For decades, Dr. Khullar has been active with her journey deep in the world of Hindi Literature. She has earned a significant recognition in the Hindi Author community. Following are few of the awards she has got-
Atal Sammaan
Jagnik Sammaan
Kashi Ratna
Sahitya Alankar
Sahitya Bhushan
Sahitya Shiromani
Vidvat Alankaran
Vidvat Bhushan
Vidya Vaachaspati
Vidya Vinodini