कथा संग्रह

मई 3, 2021

"छटपटाहट"

"Restlessness"

छटपटाहट मेरी कहानी का प्रथम संकलन है। यह संग्रह मेरी अंत: अनुभूतियों का प्रतक्षीकरण है। इसमें संकलित कहानियों आम आदमी की कहानियाँ है। समाज में जो घट रहा है, दिखाई दे रहा है, छुपा हुआ है व मौन है, वे उसी अनुभूतियों की अभिव्यंजना है। ये कहानियां मानव जीवन के कुछ अबूझ और दर्द भरे पहलुओं को उजागर करने का आईना है। यह कहानियाँ यथार्थ के धरातल पर नारी की मर्यादा, उसके आक्रोश, दुख- सुख और उत्थान-पतन की ओर कदम बढ़ाए हुए लिखी गईं है।

"ब्याहता"

"Lawfully wedded wife"

ब्याहता संग्रह सात कहानियों का संकलन है। सहज संवेदनाओं और आज के जरूरी कथ्यों से भरा है जिसमें छलते संबंधों के प्रसंग, कुछ मूल्यगत तकराहटें और मानवीय पीड़ाओं से व्यथित मन की अभिव्यंजनाएं हैं, साथ ही सामाजिक परिदृश्य का तड़पता, जलता सिसकता ब्याहता नारी के साथ का रूप चित्र एक कहानियों अंतर मन की सहचरी है, जो प्रतीक्षाएं के रूप में अभिव्यक्त हो, अपना वजूद बनाती चलती है।

"तलाश

"Pursuit"

इस संग्रह में सात कहानियों हैं, जिनमें कुछ घटनाएं, कुछ प्रसंग, कुछ मूल्यगत टकराहटें और कुछ मानवीय संवेदनाओं से दंशित मन की अभिव्यंजनाएं हैं। साथ ही सामाजिक परिदृश्य का तड़पता, जलता, सिसकता, व्याकुल होता, भटकता, अपने पड़ाव की पनाह लेता हुआ मन, अन्वेषण की प्रतीक्षा में मुकम्मल जहाँ की तलाश करता है। जिंदगी की कशमकश और विसंगतियो को झेलने वाले निर्बल व्यक्तियों पर मेरी निगाह, कहानी का केंद्र बनकर मुझे अपने में समेट लेती है।

"रिश्तों की डोर"

"Ties of Kinship"

रिश्तों की डोर में मानवीय सोच, टूटते परिवार, जीवन के प्रति दृष्टिकोण से लेकर एक विवश जिंदगी के बोझ की कुंठा मन को बोझिल करती है। इस संग्रह में नौ (9) कहानियों हैं जिसमें कुछ घटनाएं, कुछ प्रसंग, कुछ मूल्यगत टकराहटें और कुछ मानवीय संवेदनाओं से व्यक्ति के मन की अभिव्यंजनाएं हैं। साथ ही सामाजिक परिदृश्य का तड़पता, जलता, सिसकता, व्याकुल होता, भटकता, अपने पड़ाव की पनाह लेता मन, रिश्तों की डोर में बंधता और मुक्त होना चाहता है। ये सभी कहानियां पूर्व नियोजित नहीं बल्कि तत्काल उत्पन्न सुख-दुख व्यथा भावनाओं की स्वतः स्फूर्त अभिव्यक्ति हैं। जो लोगों को यह अहसास करा देती है की मैं सच हूँ।

"हाँसिये पर ज़िन्दगी"

"Life on the Margins"

हासिए पर जिंदगी इसमें 10 कहानियों हैं जो मन की संवेदनाओं से ओतप्रोत जीवन के दुख-सुख की अनुभूति कराती है। इस संकलन में मानवीय सोच, टूटते परिवार, जीवन के प्रति दृष्टिकोण, स्वार्थ के लिए किस हद तक चले जाना, विदा होने के दर्द को लेकर, एक विवश जिंदगी के बोझ की कुंठा मन को बोझिल करती है। मौत स्वाभाविक प्रक्रिया है पर उसको कृत्रिम रूप देना स्वार्थ की पराकाष्ठा को पार करता है।

अतिरिक्त रचनाएँ