"ज़िन्दगी एक-दास्तान"
“जिंदगी एक दास्तां” मन की अनंत भावनाएं जब श्रद्धा समन्वित हो जाती हैं तो वो मन गुरुभक्ति में समर्पित होना चाहता है, क्योंकि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से गुरु ही जीवन का प्रकाश है। जिसके सहारे हम जीवन की वैतरणी पार कर ज्ञान का अखंड दीप जला सकते हैं। इस पुस्तक में मैंने अपने सम्माननीय गुरुजनों को नमन करते हुए अपने श्रद्धा सुमन समर्पित किए हैं जो मेरे जीवन पथ के प्रेरणा स्रोत ही नहीं, ज्ञान की जोत जगाने वाले महानतम मनीषी थे। बटुकनाथ शास्त्री खिसते जी और दूसरे साहब जी, सरकार जिनके 10-5 बार दर्शन मात्र से ही मेरी आत्मा ने उन्हें गुरु मान लिया था। मेरे मन में उनके लिए असीम श्रद्धा भक्ति है तभी तो उनके भी प्रयाण से पूर्व मुझे स्वप्न में उनके दर्शन हुए की सरकार जाने वाले हैं। श्रद्धा से भावविभोर हो मेरी कलम ने जो भी लिखा वह सब आपके सामने “जिंदगी एक दास्तां” में अंकित है। बाकी दोहों में मेरी भावनाएँ समर्पित है। शेष 10 आईनों में मेरे जीवन का भोगा हुआ यथार्थ सत्य जो वेदना और दर्द से आहत मन को क्षत-विक्षत किए व एक छोटा सा स्वरूप है।





