"सहमी पलकों का सच"
सहमी पलकों का सच एक आदर्श परिवार के बुलंदी छूते अस्तित्व का खंड-खंड होना, मन वेदना से आहत करता है। जिस परिवार को सत्यम ने एकता का स्वरूप देकर खड़ा किया था वह अपनी भावनाओं खून-पसीने से उसमें शांति, शिक्षा, प्यार, संस्कार, मर्यादा, त्याग, समर्पण में मेहनत व ईमानदारी की बेल बोई थी और अपने अथक परिश्रम से पूरे परिवार के प्रति दायित्व निभाया था, उसी परिवार की कमजोर कड़ियों को मोहरा बनाकर केतकी मौसी खेल खेलने में हमेशा सफल रही। हंसता खेलता परिवार अपनी सीधी चाल भूलकर टेढ़ी राह में भटक गया था पर मननो का कहना है कि बदलता वक्त शायद कोई नया प्रकाश फैला दे।





